केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में मंजूरी दी
सरकार ने सूचना के अधिकार पर अब नया पहरेदार बैठा दिया है। केंद्रीय मंत्रीमंडल की गुरुवार को हुई बैठक को जिस नेशनल डेटा शेयरिंग एंड एक्सेसिबिलिटी पॉलिसी को मंजूरी दी उसके तहत हर छह महीने में इस बात की समीक्षा करेगी कि कौन-सी सूचनाएं व आंकड़े जनता को उपलब्धता कराए जा सकते हैं।
हालांकि मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का कहना था कि इसके सहारे सरकार यह देखेगी कि प्रतिबंधित सूची में ऐसी कौन सी सूचनाएं मौजूद हैं जो जनता को मुहैया कराई जा सकती हैं।
सोनी के अनुसार इसके तहत सभी मंत्रालयों को अपनी फाइलों में मौजूद ऐसी सूचनाओं का वर्गीकरण करना होगा जो जनता को दी जा सकती हैं। साथ ही इस सूची की हर छह महीने में समीक्षा भी की जाएगी। 2005 में लागू सूचना का अधिकार कानून ने सरकार को कई मौकों पर उलझन में भी डाला है।
चाहे वो शर्म-अल-शेख में पाकिस्तान के साथ बातचीत पर आरटीआई के सहारे मांगी गई जानकारियां हो या फिर गृहमंत्रालय से पद्म पुरस्कारों के मानदंडों की दरियाफ्त, सूचना के अधिकार को लेकर सरकार के भीतर सूचनाओं के बहाव नया बांध बनाने को लेकर मंथन काफी समय से चल रहा था।
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